केक हमारी संस्कृति नहीं है,
यह हिंदुओं की रीति नहीं है,
केक तो काटना सिखाता है,
परिवार को बांटना सिखाता है,
यह असभ्यता को लुभाता है,
यह कर्जे में डुबाता है
हमारी संस्कृति शुभ-शुभ,
अक्षत धागा मौली है
हिंदुओं की पहचान तो,
पूजा-चन्दन रोली है,
अगर देश और समाज से है प्रीति,
केक हटाओ और बचाओ संस्कृति।
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