लाठी और गुलाब ने, फकीर और नवाब ने, एकता गला दिया, अखंडता जला दिया। नीतियां अपंग थीं, फूट ही में जंग थी, कालगत हो लेट गए, कलह यहां को भेंट गए। आज जो शुमार है, अतीत की ही मार है, राष्ट्र तार-तार है, अखंडता बीमार है।
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