जन्म लिया संसार में,
यह तो है संयोग।
तुझमें क्या कुछ खास है,
केवल करता भोग।।
जन्मदिवस तो आजकल,
फैशन का है रोग।
करें दिखावा फालतू,
सज्जन जैसे लोग।।
ज्यों-ज्यों बढ़ता साल है,
उम्र घटे हर बार।
पल-पल आता काल है,
कैसे हो त्यौहार।।
अगर मनाना चाहता,
वर्षगाँठ ही आप।
जन्मदिवस में दानकर,
दूजों का दुःख भाँप।।
मुझे शिकायत आप ही,
जन्म लिया बन भार।
परहित तो आता नहीं,
जीवन है बेकार।।
तुझमें ऐसी बात हो,
बन जाए संयोग।
कर्म तुम्हारी प्रेरणा
दिवस मनाएँ लोग।।
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