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बुधवार, 17 अप्रैल 2019

सुकून

वह पूंजीपति भिखारी,
दर-दर भटकता था,
'सुकून' की तलाश में,
दूर-दूर तक,
ताकता चला जाता था,
तब एक गरीब जो,
धनी था 'सुकून' का,
बिठाया उसको,
'सुकून' की चारपाई पर,
परोसा भी उसने,
मक्के की रोटी में,
धनिया की चटनी का 'सुकून'
नींद भी आई तो,
सपने में देखा,
यही तो था,
दुर्लभ, 'सुकून'

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