सियासत के दाँव पर अपना, सब कुछ अर्पण कर दिया, सगे-सम्बन्धियों समाज का, जीते जी तर्पण कर दिया और, जहरीले नेताओं को देखकर, साँप ने भी आत्मसमर्पण कर दिया।
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