मैं ही हिंदू, मुसलमां भी हूँ,
गीता का वाचक, कलमा भी हूँ,
सगुण भी मैं हूँ, निर्गुण भी हूँ,
संसार का सारा अवगुण भी हूँ।
प्रश्न भी मैं हूँ, उत्तर भी हूँ,
वर्तमान देख निरुत्तर भी हूँ।
मैं नतमस्तक, अहंकारी भी हूँ,
सदकृत्यों का आभारी भी हूँ।
पवित्र हृदय हूँ, कामी भी हूँ,
सफलता भी हूँ, नाकामी भी हूँ।
सब कुछ हूँ मैं, तू भी सब है,
मुझमें ईश्वर, तुझमें रब है।
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