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रविवार, 27 अगस्त 2017

बहरी जनता

पाखंड बलिष्ठ
और धर्म रो रहा है,
पता नहीं मेरे देश में
ये क्या हो रहा है,
कोई अमर नहीं है,
फिर भी अनुशासनहीनता
अपने चरम सीमा पर है,
मानवता रूपी शरीर की जगह
बचा केवल कीमा भर है,
कपट के तलवार से
पवित्रता को काटा जा रहा है,
धर्म के ठेकेदारों द्वारा
मेरा देश बांटा जा रहा है,
अलगाववाद की ज्वाला में
लोग रोज मर रहे हैं,
कलियुग के मक्कार पुतले
ईश्वर को बदनाम कर रहे हैं,
''राजनीति''अब
अराजकता का प्रहरी है,
प्रशासन मौन!
और जनता बहरी है!!!

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