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शनिवार, 17 दिसंबर 2016

ढोल

राजा पिटवइस ढोल,
दिमाक ल सेक अउ,
मीठा बोली बोल,
अरे! मंत्री!
गाॅंव म कइसे शांति छाहे,
का गाॅंव वाले मन,
हंडा-बटुवा पाहे,
अरे! अइसन शांति रही,
त हमर का होही,
हमर बर बोट अउ,
खुर्सी के बीजा कोन बोही,
तव! तव जनता ल लड़वा,
उनला अशांतिके भेंट चढ़वा,
कोनो चुरपुर आॅफर निकाल,
तहाॅं मचन दे फेर बवाल,
अच्छा साहेब!
त निकाल दे न संविदा,
आजकाल एखरे उप्पर,
सबझन हवय फिदा,
फेर घुनहा आटा ल,बने चालबे,
सस्ता पोस्ट,शिक्षाकर्मी निकालबे,
उहू ल तीन महीना बाद ओगारबे,
अउ मनीराम मिलही तेला जेब म डारबे,
तहाॅं सात महीना तक,
स्कूल म बइठार के,
कर देबे मास्टर मन ल बिदा,
हवय न बड़ा चुरपुर आॅफर,
शिक्षाकर्मी संविदा!
वाह रे मंत्री!
कहाॅं लुकाए रहे,
अपन कूटनीतिक दिमाक,
तहीं हर राखे हवस,
भ्रष्टाचार के नाक,
त जा संविदा पोस्ट निकाल के,
पंचायत म धांधली करवा,
गाॅंव म शान्ति काबर रहय,
गाॅंव वाले मन ल लड़वा,
सोन-चिरइया राज के,
मैं हर आॅंव भोगी,
जेखर पाछू पाएॅंव खुर्सी,
अब बनाहूॅं मैं ओही मन ल रोगी।।

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