कतका सुग्घर बिदा
नानकुन बिचारी नोनी,
गली-गली लगइस चक्कर,
तहॅं ले कभू जाके,
आधा ठोमहा मिलिस षक्कर,
दाई गे हवय खेत,
साइड म गे हवय ददा,
घर म तो काहिंच नइये,
आ गे हवय सगा,
ब्योहारी तो करना हे,
काम ल पुरकाना हे,
काहीं नहीं त चहा देके,
सगा ल सरकाना हे,
मंडल हर बनी नइ ढिले हे,
अउ साइड के पइसा नइ मिले हे,
कोन जानत हे नोनी के घर,
चाउर दार कबके झरे हे,
भूरी तापे बर आगी घलो,
बरे हे के नइ बरे हे,
नोनी चिरहा चैनस ल देखके,
टकर्रा मन आॅंखी ल सेंकत हे,
अउ पेट हर कब के चिराहे,
तेला कोनो कुकुर नइ देखत हे,
कोनो नइ पूछय नोनी ल,
खाय हस के नहीं,
पूछ लीस त धनिया काकी,
उही भर सहीं,
काकी के कतका सुग्घर चाल हे,
फेर उहू हर का करय,
ओखरो तो नोनी कस हाल हे,
फेर सगा हर ए बात ल,
कहाॅं जानत हे,
सगा हर तो बिहिनिया के आय,
खटिया म लात तानत हे,
तभोले नोनी हर कतका चंट,
आरा-पारा ले चुपे,
चाउर-दार बरो लिस,
दाई-ददा कमाके आय नइये,
सगा ल बिदा देके झरो दिस।।
यहां पर है-
शनिवार, 17 दिसंबर 2016
बिदा
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