ददा कहे बेटी मोर, पढ़े बर निकले हे,
आज नहीं काल, बगराही नाव सबके,
बेटी हवे जग के, अंजोर पूरा देश कहे,
चार बेटा अस हवे, बेटी एक अबके,
दाई चिहुल रोवत हे, ददा रद्दा जोहत हे,
छाती करे धक धक, आँखी उंखर डबके,
दाई मुड़ी धरे रद्दा, देखे रानी बेटी के,
अभी तक आय नइये, निकले हे कबके
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