मनोज श्रीवास्तव नवागढ़
यहां पर है-
शनिवार, 15 जुलाई 2023
अस्तित्वहीन हो गया
तू बादल से टूटकर,
और भी महीन हो गया,
अरे बूंद रहकर ही ठीक था,
सागर में मिला तो
अस्तित्वहीन हो गया
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