मनोज श्रीवास्तव नवागढ़
यहां पर है-
गुरुवार, 10 फ़रवरी 2022
दोस्ती की कटार
जीत हरदम होती रही
कभी हारा नहीं हार से
नफ़रत क्या है पता नहीं,
पाला पड़ा बस प्यार से,
औऱ खंजर तो मेरा कुछ
बिगाड़ ही नहीं पाया,
मैं तो मरा हूँ,
दोस्ती की कटार से...
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