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गुरुवार, 25 अक्टूबर 2018

रमेश भईया

शमिगणेश के धाम म, हवय रमेश चौहान,
ददा हे मेलन सिंह, दाई रामकली फुरमान,
रमेश हवय मयारू अउ लइका रिद्धि, भोला,
सुग्घर ओखर बुद्धि, बड़ सादा हावय चोला,
छंद म कविता लिखे, छत्तीसगढ़ के शान ग,
संस्कृति के रक्षक हे, काव्य जगत के मान ग,
बिचार हे ओकर चाकर, बड़ई करय जन-जन,
अइसन रचनाधर्मी ले, नवागढ़ होगे धन ध।।

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