यहां पर है-

गुरुवार, 21 जून 2018

लहर हो रहा है

धुआँ-धुआँ,
हर शहर हो रहा है,
तेरे लिए ही,
जहर हो रहा है,
खुद के लिए ही,
तैयार है गड्ढा,
धीरे-धीरे यूँ,
कहर हो रहा है,
पग-पग में है मौत,
हर वक़्त हर,
पहर हो रहा है,
रोक ले वक़्त है,
जहन्नुम के परचम में,
लहर हो रहा है।

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