धुआँ-धुआँ, हर शहर हो रहा है, तेरे लिए ही, जहर हो रहा है, खुद के लिए ही, तैयार है गड्ढा, धीरे-धीरे यूँ, कहर हो रहा है, पग-पग में है मौत, हर वक़्त हर, पहर हो रहा है, रोक ले वक़्त है, जहन्नुम के परचम में, लहर हो रहा है।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें