सरहा लकड़ी बरोबर जिनगी घुन्ना हो जाही, मान-मर्यादा संस्कृति हर अधरहा अउ उन्ना हो जाही, गहना बरोबर सहेजव सियान ल, बिन सियान के घर संग देश अउ समाज सुन्ना हो जाही..
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