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मंगलवार, 12 दिसंबर 2017

मन की आवाज

लिखने को तो लिख दुंगा कुछ भी,
लोग गॅंवारा करेंगे!
होगी गलती लिखने पर,
हॅंसकर गलती सॅंवारा करेंगे!
व्यर्थ बातों को,
सुनकर बहक जाऊॅं तो,
सही रास्ते की ओर इशाारा करेंगे!
सबका दुख हरने का बीड़ा उठाऊॅं,
तो दुखियों पर दया की,
दृष्टि भी डाला करेंगे!
समाजोद्धार करने को निकलूॅं तो,
शुभकामनाओं को वारा करेंगे!
कोई जुगनू भी आये कहीं से,
उसे जुगनु से तारा करेंगे!
शत्रु करे मुझपर हमला तो,
मिलकर भी मारा करेंगे!
चुरा ले गया है सम्मान कोई,
उसे फिर से हमारा करेंगे!
प्रथम बलि भी देता हूॅं अपनी,
मेरे बाद, स्वप्राणों को हारा करेंगे!

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