अर्धांगिनी संसार में, आधा अंग कहलाय। दुःख, पीड़ा, संताप में, वर का मन बहलाय। वर का मन बहलाय, मान रखे निज घर का, तिनका-तिनका जोड़, ख्याल रखे हर मन का। अर्धांगिनी बिन संसार, यह जीवन निराधार।।
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