बने-बनाये शब्दों पर तू क्यों फंदे, कलम सलामत है तेरी तू लिख बन्दे, उम्मीद मत कर कि कोई आएगा तुझे तेरे दर पर सिखाने, इंसान को देख, तू खुद सीख बन्दे, बुराई लाख चाहे भी तुझे फंसाना, अच्छाई को पूज, खुद मिट जाएंगे, विचार गंदे।।
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