जनहित के काम बड़ अलकरहा हे साधु बने घूमत बरहा हे, लाईन म खड़े होवइया के बल नई सिरावत हे, तभोले कोंजनी काबर पड़ोसी के अंग-अंग पिरावत हे।।
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