मोरो घर दीया बरही
आंसो के देवारी म,
मोरो पुरखा मन तरही,
आंसो के देवारी म,
जग होही अंजोर,
आंसो के देवारी म,
महरही गली-खोर,
आंसो के देवारी म,
भरही सबके पेट,
आंसो के देवारी म,
मिलही अड़बड़ भेंट,
आंसो के देवारी म,
मया के फोरहूं खुरहोरी,
आंसो के देवारी म,
खुशी मिलही कोरी-कोरी,
आंसो के देवारी म....
मनोज कुमार श्रीवास्तव
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