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शुक्रवार, 15 अगस्त 2025

मिथ्या संसार

संसार दिवा स्वप्न है,
तेरा कोई सपना नहीं है,
जगत तो मिथ्या है,
माया मोह में तपना नहीं है,
प्रभु दे रहे सतत प्रेरणा,
धरती पर कोई अपना नहीं है

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