मनोज श्रीवास्तव नवागढ़
यहां पर है-
रविवार, 13 अप्रैल 2025
भरोसा
भरोसा उसका चहुँओर था,
उसके बलबूते का जोर था,
चरमसीमा पर पहुचा विश्वास,
टूटा सपना, रात नहीं भोर था
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