यहां पर है-

शनिवार, 19 अप्रैल 2025

झूठा संसार

दिखता है, पर कोई संसार नहीं है,
तुम अकेले हो, कोई घरबार नहीं है,
जहां रहना नहीं, दिल लगा बैठे हो,
पर जहां जाना है, उनसे प्यार नहीं है

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें