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बुधवार, 7 जुलाई 2021

प्रभु जी मिले

मन में मेरे हैं बस,
कुछ शिकवे-गिले,
अभी तक प्रभु,
नहीं हैं मिले,
मन में कसक है,
नयन में नमी,
शायद है मुझमें,
अभी तक कमी,
अहं का है टुकड़ा,
कहीं पर पड़ा,
लालच का घोड़ा,
कहीं है अड़ा,
न मुझसे चले,
न खुद से हिले,
ऐसे में कैसे,
प्रभु जी मिले,
क्रोधी अभी भी,
मन है मेरा,
दाता से अपना,
मुख है फेरा,
भक्ति-सुमन तो,
कहीं न खिले,
ऐसे में कैसे,
प्रभु जी मिले
मोहित अभी भी,
क्षणिक मोह में,
कामी कहीं तो,
हृदय गोह में,
सुमिरन करत काहे,
जिव्हा छिले,
ऐसे में कैसे,
प्रभु जी मिले,
अभी तक प्रभु जी,
तभी न मिले

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