यहां पर है-

गुरुवार, 27 फ़रवरी 2020

व्यंग्य के बाण

व्यंग्य के बाण,
कहीं से टूट गए हैं।
शायद मेरे शब्दकोष,
मुझसे रूठ गए हैं...

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें