मनोज श्रीवास्तव नवागढ़
यहां पर है-
गुरुवार, 27 फ़रवरी 2020
व्यंग्य के बाण
व्यंग्य के बाण,
कहीं से टूट गए हैं।
शायद मेरे शब्दकोष,
मुझसे रूठ गए हैं...
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