यहां पर है-

बुधवार, 4 दिसंबर 2019

मरे ल परही

जोजियाय छोड़ के,
कुछू करे ल परही,
पर भरोसा छोड़,
अपन दुख खुदे,
हरे ल परही,
नरम दल छोड़,
गरम दल धरे ल परही,
फुलही होय म नई बनय,
लसलस ले फरे ल परही,
सिद्ध होगे अपराध,
त नंगद के छरे ल परही,
अउ जीना हे मुड़ी उठा के,
त कई खेप मरे ल परही...

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