जोजियाय छोड़ के, कुछू करे ल परही, पर भरोसा छोड़, अपन दुख खुदे, हरे ल परही, नरम दल छोड़, गरम दल धरे ल परही, फुलही होय म नई बनय, लसलस ले फरे ल परही, सिद्ध होगे अपराध, त नंगद के छरे ल परही, अउ जीना हे मुड़ी उठा के, त कई खेप मरे ल परही...
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