अभिमान तो अपने करम पर है,
पर भिक्षावृत्ति अपने चरम पर है,
प्रतियोगिता के इस दौर में,
आदमी काम सीख जाता है पर,
आज छोटे से छोटा बच्चा,
भिक्षा मांगते दिख जाता है,
हमें सहानुभूति से काम,
जरूर लेना चाहिए किंतु,
समर्थवान और बच्चों को,
भिक्षा नहीं देना चाहिए,
चाहे तो दुखियों के दुख,
और सन्ताप हर सकते हैं,
हम भिक्षा मांगने वालों की,
जरूरतें पूरी कर सकते हैं,
पर हमारे कर्मों में ही उचित,
अनुचित समाहित होते हैं
नकद पैसा देने से बच्चे,
अनर्गल की ओर,
प्रोत्साहित होते हैं,
इसलिए सहायता करने का,
पुण्य भी ले लीजिए,
उन्हें आवश्यकता की
वस्तुएं दे दीजिए,
क्योंकि,
देश पर अभिशाप है,
भिक्षावृत्ति पाप है।।
यहां पर है-
शनिवार, 16 फ़रवरी 2019
भिक्षावृत्ति पाप है
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