चोचला के तरिया म, मोर देश बुड़गे आज, उल्ला होगे बड्डे, छरियागे लोक-लाज, बुझावत हवे मोमबाती, मुँह म चुपरय केक, झुमरत हवे बइहा कस, ढोंकत हवे पेग, पोक्खा मोरे गोठ हे, कान म अपने खोंच ला, हमरे टोंटा मसकत हवे, हमरे-तुंहरे चोचला।।
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