जिनगी के रटहा पेड़ म चढ़त हस, भुरभुरहा सपना हकन के गढ़त हस, साढ़े तीन हाथ भुंइयेच म जाना हे, तभो 5 हाथ बर भाई ल लड़त हस।।
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