मनखे तैं हर माटी अस,
मैं बड़े, मैं सुंदर, मैं ज्ञानी,
सबले बढ़िया,
तोर मन के भरम!
अरे! भगवान बनाके खेलय तोला,
तैं अइसन भौंरा-बाॅंटी अस,
धर्म करेंव, दान देंव, सेवा करेंव,
एहू तोर मन के भरम,
चारा धर के तुरतुर-तुरतुर,
रेंगत तैं हर चांटी अस,
मनखे तैं हर माटी अस।
मोर नाव हे, मोर गाॅंव हे, मोर धाक हे,
ये तोर भुरभुरहा सोंच,
तोरे पीढ़ी नई जाने तोला,
अइसन तैं ओरवाती अस,
मनखे तैं हर माटी अस।
तैं सब कुछ त फेर,
तैं दुखी काबर! डोकरा काबर!
बिमरहा काबर! असहाय काबर!
अरे! अहंकारी अब तो समझ!
ए दुनिया रूपी खटिया म,
तैं तो रटहा पाटी अस,
मनखे तैं तो माटी अस।।
मैं बड़े, मैं सुंदर, मैं ज्ञानी,
सबले बढ़िया,
तोर मन के भरम!
अरे! भगवान बनाके खेलय तोला,
तैं अइसन भौंरा-बाॅंटी अस,
धर्म करेंव, दान देंव, सेवा करेंव,
एहू तोर मन के भरम,
चारा धर के तुरतुर-तुरतुर,
रेंगत तैं हर चांटी अस,
मनखे तैं हर माटी अस।
मोर नाव हे, मोर गाॅंव हे, मोर धाक हे,
ये तोर भुरभुरहा सोंच,
तोरे पीढ़ी नई जाने तोला,
अइसन तैं ओरवाती अस,
मनखे तैं हर माटी अस।
तैं सब कुछ त फेर,
तैं दुखी काबर! डोकरा काबर!
बिमरहा काबर! असहाय काबर!
अरे! अहंकारी अब तो समझ!
ए दुनिया रूपी खटिया म,
तैं तो रटहा पाटी अस,
मनखे तैं तो माटी अस।।
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