नता मन आज, अम्मठ होवत हे, मया-पिरीत हर, चिहर के रोवत हे, लागमानी म, चेर्रा होगे पहुनई घलो, खसर्रा होगे, चारो मुड़ा अनदेखई के, कोटना हे, जिनगी के कपास, सोज्झे ओटना हे, हटर-हटर करई म, कुछुच नई पाय, अइसनो जिनगी हर, घलो जिनगी आय!!
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