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गुरुवार, 17 मई 2018

इंसान देखना है

शम्मा तो हाथों में,
रौशन है साहिब,
तेरे सितारों का अब
इम्तिहान देखना है,
कद तो दुनिया में,
यूं ही बढ़ जाता है,
ऊंचाई के मंजर में,
आसमान देखना है,
शख्सियत को तुमने,
खरीदा भी होगा,
वक़्त के इशारे पर,
खानदान देखना है,
हुकूमत की ताकत,
धोखा है पगले,
बागियों के काफिले में,
पहलवान देखना है,
लूटने को तुझसे,
हर कोई खड़ा है,
तुझमें वफ़ा और,
ईमान देखना है,
आस्तीन के साँपों को तूने,
बड़े प्यार से पाला है,
कौन पकड़ता है तेरा,
गिरेबान देखना है,
काबीलियत तू अपनी,
मुकम्मल भी कर दे,
हकीकत की तुझमें,
इंसान देखना है।

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