आये थे जो राजा बनकर,
हाथ पसारे चले गये,
हड्डी-पसली चूरा बन गईं,
ताक-निहारे चले गये,
दावे किये थे बड़े-बड़े,
किसके द्वारे चले गये,
जीते बाजी उम्र तलक जो,
जीवन हारे चले गये,
प्रबल शक्ति के अभिमानी थे,
वे भी सारे चले गये,
नास्तिकता की मूरत थे जो,
राम पुकारे चले गये।
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