एस सी एस टी,
ओबीसी, जनरल,
मानवता पर,
हावी हो रहा है,
जातिवाद के गर्त में,
"भारतीय"
लुप्त हो रहा है।
अलगाववाद का जहर,
एकता की नसों में,
इस कदर
घुल गया है,
ऊंच-नीच भेद-भाव में,
आदमी जीना
भूल गया है,
कब कौन मर जाए,
सिर्फ ईश्वर जानता है,
फिर भी
मूर्ख आदमी,
खुद को,
भगवान मानता है,
मरने से पहले,
अपने दुर्व्यवहार पर,
कस ले शिकंजा,
भेद-भाव,
लड़ाई-झगड़ा छोड़,
आदमी बन जा,
न तू रहेगा, न तेरी हस्ती,
फिर कैसा अहंकार है
बड़े-बड़े लोग मिट गए,
जिंदा सिर्फ संसार है।
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