यहां पर है-

शुक्रवार, 23 मार्च 2018

न्याय

न्यायपालिका के न्याय का,
नवसन्धार होना चाहिए,
कुकृत्य के आरोप पर,
कठोरता से विचार होना चाहिए।
युवक हो दोषी तो मृत्युदंड मिले,
युवती गर दोषी हो तो,
वह भी बेघरबार होना चाहिए।
अपराध के स्तर पर,
कठोर सजा का निर्धारण हो,
हर उस व्यक्ति को सजा मिले,
जो अपराध का कारण हो।
कानून के भय से अपराधी,
स्वयं अपने बाल नोचे,
क़ानून से खेलने वाला,
हर शख्स सौ बार सोचे,
झूठे आरोप लगाने वालों का
रूह कांप जाए,
अपराध करने से पहले ही,
वह अंजाम भांप जाए।
तब मेरे देश से अपराध,
खत्म हो जाएगा,
और संसद में पारित अभिलेख,
सचमुच न्याय कहलाएगा।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें