अब फेर बंटाही पईसा दारू, त हकन के ढोंकही लेड़गा समारू, चम्मस के घलो रइही चांदी, घर म घेरी पइत कुकरा राँधी, लोकतंत्र के बोली, लगाही सादा कुरथा, पांच साल के पहिली ल, कर ले तैं हर सुरता।।
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