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शुक्रवार, 9 फ़रवरी 2018

लोकतंत्र के बोली

अब फेर बंटाही पईसा दारू, त
हकन के ढोंकही लेड़गा समारू,
चम्मस के घलो रइही चांदी,
घर म घेरी पइत कुकरा राँधी,
लोकतंत्र के बोली,
लगाही सादा कुरथा,
पांच साल के पहिली ल,
कर ले तैं हर सुरता।।

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