कोई शत्रु हो या परममित्र हो, उंगली वही उठाए, जो स्वयं ही पवित्र हो, आलोचना का प्रतिबिंब तो, कोई भी हो सकता है, मानव वही, जो सदमार्ग का चलचित्र हो, विचारों में दुर्गंध तो बहुत हैं, धर्म की रक्षा होगी जब, कृत्य में सुकर्म का इत्र हो
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