क्रांतिकारियों ने क्या-क्या सहा होगा,
देशभक्ति का मजा जाने कैसा रहा होगा,
मेरे वीरों का जब लहू बहा होगा,
पवित्र खून से चाबुक धन्य हुआ होगा,
फिरंगियों को भगत ने
दौड़ा-दोड़ा कर कूटा होगा,
बिस्मिल ने भी खजाना
मजे से लूटा होगा,
तो आजाद ने भी जंगल में,
योजना बनाई होगी,
और आजादी पाने वीरों ने,
खूनी होली मनाई होगी,
हथियार लूटने का मजा भी,
अलग रहा होगा,
गरमदल को देख,
ब्रिटिश का पसीना बहा होगा,
गांधी के भी अपने,
ठाठ रहे होंगे,
सत्याग्रह, अनशन की,
गोली दाग रहे होंगे,
उन बेटों ने भी जरूर,
महापुण्य किया होगा,
जिन्होंने इस काल की,
माॅं की कोख से
जन्म लिया होगा,
इस काल ने पत्नियों को भी,
महान बना दिया,
जिन्होंने पतियों को क्रांतिकारी,
का खान बना दिया,
तो इस काल के
बच्चों और बूढ़ों ने भी,
कोड़ों का मजा लिया होगा,
पीड़ा से कराहते हुए,
इस मिट्टी का,
वंदन किया होगा,
वे भी क्या दृश्य रहे होंगे,
जब वीरों के खून,
अपनी मिट्टी के लिए बहे होंगे,
मुझे गर्व है कि वह मिट्टी,
मेरी ही सरजमी थी,
मैं क्रांतिकारी हो न पाया,
शायद मेरे पुण्य में कमी थी।
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