हटर हटर करत हवय सब, गर्मी गेहे बाढ़ पाना झरे रुखुवा दिखे, ठक ठक ले अउ ठाड पानी ल सब फेंक के, अब काबर पछताये पानी पानी होगेस अब, पानी के मान घटाय ।।
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