ढोंगी बन साधु फिरे, आज गली घर-द्वार, मीठे-मीठे बोल कर, ठग रहे जग-संसार, ठग रहे जग-संसार, पाखंडी का धर भेष, ऐसे दुर्जन देखकर, अब रो रहा है देश, हे मनुज सुन तो जरा, सोते से अब जाग, संतों का मान बचा, पाखंडी का कर त्याग...
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