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शनिवार, 17 दिसंबर 2016

बस्तरिहा

6. बस्तरिहा
मोर भाग हवय धनभाग सहीं,
आजे जीयत हॅंव आज सहीं,
सुख-सुविधा ले कोसो दुरिहा,
अनपढ़ मनखे सुक्खा नंगरिहा,
दार मिलगे त तिहार हे मोर बर,
नई ते बथुआ साग सहीं,
मोर भाग हवय धनभाग सहीं,
दुनिया बर मैं कोसा बिनहूॅं,
उघरा रइहूॅं भोमरा जरहूॅं,
बड़हर होय के सपना जरगे,
गरिबहा जनम के दाग सहीं,
मोर भाग हवय धनभाग सहीं,
योजना के सुर्रा म बोहागेंव मैं,
विकास के बियासी म धोआगेंव मैं,
धनुस-बान के बनगे फइका,
मैं बनगेंव हिरना के लइका,
छुटावत हे त छुटावन दे,
कोनो जनम के लाग सहीं,
मोर भाग हवय धनभाग सहीं,
आजे जीयत हॅंव आज सहीं।।

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