यूँ तो कहने को अच्छाई में शुमार हो गये दिल में जब झाँका तो खुद ही मक्कार हो गये पवित्रता को खोजते बीत गया पूरा जीवन सादगी के दलदल में मैल के अम्बार हो गये और चर्चों में नाम था जरूर पर लोगों की जुबाँ पर हम मनहूसियत के बाजार हो गये
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें