यह समय नहीं है जन्मदिवस का, मरण का त्यौहार मनाने दो, शत्रु की आँखें फट जाए, ऐसा वीरों का जत्था आने दो, मेरा भी छोटा सा है स्वार्थ, मुझको भी वीरगति पाने दो।।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें