आखिरिच म तो गिन गिन के ओखना झरही, पईसा खवाईया नेता मन घिसल घिसल के मरही, अउ जनता के ठेकेदार मन, अपन करम के फल पाहीं, विकास के नाव म दगा देवाईया, डउकी लईका समेत नरक जाही
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