तोला छत्तीसगढ़ी आथे!
तोला छत्तीसगढ़ी आथे!
मुरई-भाटा के साग हर ,
तोला तो अड़बड़ मिठाथे,
फेर तोला छत्तीसगढ़ी आथे!
अंग्रेजी के मोट्ठा पोथी ल,
धरे हवस कुरिया म,
अउ अपन राज के भाशा बर,
तोर जी तरमराथे ?
तोला छत्तीसगढ़ी आथे !
खाये-खेले बनाए संगवारी,
पहली किंदरेस बारिच-बारी,
अब बाढ़ गे हवस डंग-डंग ले,
त ओही बारी के सुरता भाथे ?
तोला छत्तीसगढ़ी आथे !
हमर भुॅंइयाॅं होगे पोठ,
त होवत हे कइठन गोठ,
फेर ए भुॅंइयाॅं बर कोनो,
आॅंय-बाॅंय गोठियाथे,
मंता तोरो भोगाथे ?
तोला छत्तीसगढ़ी आथे !
ददा के घलो बाढे़ हे टेस,
लइका दउड़त हे,
कुसंस्कृति के रेस,
अपन पढ़े सरकारी स्कूल म,
अउ लइका ल अंग्रेजी म पढ़ाथे,
फेर कभू लइका ल पूछे हवस ?
तोला छत्तीसगढ़ी आथे !
कमाये-खाये गे हवस दिल्ली-पूना,
उहाॅं के रंग म बुड़ गेस कई गुना,
आखिर म आये अपनेच माटी,
काम आइस खूरा,
अउ काम अइस पाटी,
खूरा-पाटी म तोर,
नींद बने झमझमाथे,
फेर गुनके देख,
तोला छत्तीसगढ़ी आथे !
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शनिवार, 17 दिसंबर 2016
छत्तीसगढ़ी आथे
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