महूं खड़े हॅंव
ए कका! देसी ल छोड़,
अंग्रेजी ल गटक,
एती-तेती झन बिचार,
मोरे चिनहा म ठप्पा पटक,
चार दिन बर तुंहर ले छोटे हॅंव,
तहाॅं पाॅंच साल बर महीं बड़े हॅंव,
देखे रइहव ददा-भाई,
चुनाव बर महूँ खड़े हॅंव,
पुराना गोठ हे काबर,
गोठ नवा ल धर,
पाॅंच सौ के पत्ती देत हॅंव,
जादा चिक-चिक झन कर,
अरे! परिवार के,
कका-बेटा संग लड़े हॅंव,
देखे रइहव ददा-भाई,
चुनाव बर महूँ खड़े हॅंव।।
मनोज श्रीवास्तव
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