यहां पर है-

शनिवार, 17 दिसंबर 2016

बाई

छत्तीसग़िढया हिन्दी
बाई ल लाएंव शहर,
घुमाएंव चारो डहर,
मोर बाई रहिस देहाती,
चाकर-चाकर लगइस बिन्दी,
तहाॅं मारिस छत्तीसगढि़या हिन्दी,
मोला कहिस-तुम हमला,
चारो मुड़ा नई घुमाएगा,
तो हमारा मंता भोगा जाएगा,
मैं कहेंव बाई-घुमाहूं तोला सबो कती,
फेर तैं झन घुमा अपन मती,
अइसने कभू तैं हिन्दी बोलबे त,
संविधान ल खोले ल पर जही,
अउ जम्मो भाशा के प्रोफेसर ल,
छत्तीसगढि़या हिन्दी बोले ल पर जही।

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