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शनिवार, 18 अक्टूबर 2014

माॅं


सूर्य की सूनहरी किरणें,
आयी माॅं के द्वार,
चंद्रमा ने भरकर भेजा,
रजत विभा उपहार,
कब से खड़ा हूॅं देख जरा माॅं,
अब तो कर उद्धार ।।

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