मनोज श्रीवास्तव नवागढ़
यहां पर है-
गुरुवार, 16 मई 2019
अभिमान
महाकाल है यही कही,
पलपल होता भान।
झूठा जीवन जी रहा,
तजा नहीं अभिमान।।
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