मनोज श्रीवास्तव नवागढ़
यहां पर है-
रविवार, 6 नवंबर 2022
पेड़ हूँ इंसान थोड़ी हूँ
दूर क्यों है,
जरा नजदीक आकर देख,
तेरी गर्मी की खाई को,
शीतल हवा से पाट दूंगा,
तुझे बहलाऊंगा, सहलाऊंगा,
बैठने के लिए टाट दूंगा,
डरता क्यों है पगले!
मैं पेड़ हूं, इंसान थोड़ी हूं,
जो तुझे काट दूंगा
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